फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ विवाद: सच्चाई, संवेदनशीलता और अदालत का रुख
देशभर में इन दिनों जिस फिल्म की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह है ‘उदयपुर फाइल्स’। यह फिल्म 2022 में राजस्थान के उदयपुर में हुई कन्हैया लाल टेलर हत्या कांड पर आधारित है।
घटना की संवेदनशीलता और धार्मिक पहलू को देखते हुए फिल्म का ट्रेलर आते ही यह विवादों में घिर गई है।
आइए जानते हैं इस पूरे मामले की कहानी, विवाद और ताज़ा अपडेट।
फिल्म किस बारे में है?
‘उदयपुर फाइल्स’ की कहानी 2022 में उदयपुर शहर में हुई उस दर्दनाक और सनसनीखेज घटना पर आधारित है जिसने पूरे देश को हिला दिया था।
इस घटना में कन्हैया लाल टेलर, जो पेशे से दर्जी थे, की दिनदहाड़े चाकुओं से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते यह मामला राष्ट्रीय बहस और गुस्से का कारण बन गया।
इस वारदात को सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि धार्मिक कट्टरता और सामाजिक तनाव की जड़ तक जुड़ा हुआ अपराध माना गया।
लोगों के मन में उस समय कई सवाल उठे – आखिर क्या वजह थी? यह साजिश कितनी पहले से रची गई थी? और प्रशासन या पुलिस इस घटना को रोकने में क्यों नाकाम रही?
इन्हीं सवालों के जवाब खोजने और घटना की पूरी सच्चाई को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इस फिल्म का निर्माण किया गया है।
निर्माताओं का दावा है कि ‘उदयपुर फाइल्स’ किसी कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि असली केस फाइल्स, जांच रिपोर्ट और गवाहियों पर आधारित सच्ची कहानी है।
फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे इस हत्या ने एक साधारण परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया और समाज को झकझोर कर रख दिया।
निर्माता यह भी कहते हैं कि दर्शकों को यह फिल्म केवल घटना नहीं, बल्कि उस दौर के सामाजिक माहौल, कानून-व्यवस्था की स्थिति और लोगों के डर को भी महसूस कराएगी।
उनका उद्देश्य है कि लोग सिर्फ सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि घटनाओं के पीछे की पूरी सच्चाई और तथ्यों को जानें।
यानी, ‘उदयपुर फाइल्स’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उस समय की वास्तविक घटनाओं का दस्तावेज़ है जो सवाल पूछती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
विवाद क्यों हुआ?
1. धार्मिक तनाव का खतरा
फिल्म रिलीज़ से पहले ही विरोध करने वालों का कहना है कि यह फिल्म धार्मिक कटुता और नफरत को बढ़ा सकती है।
कई संगठनों ने आशंका जताई कि फिल्म से साम्प्रदायिक सौहार्द को नुकसान हो सकता है।
2. पीड़ित परिवार की निजता का सवाल
विरोधियों का तर्क है कि बिना परिवार की सहमति के इस विषय पर फिल्म बनाना उनकी मानसिक पीड़ा को और बढ़ा सकता है।
3. राजनीतिक मकसद का आरोप
कुछ लोग इस फिल्म को राजनीतिक एजेंडा से जोड़ रहे हैं और मानते हैं कि फिल्म के जरिए माहौल को चुनावी फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
जुलाई 2025 में फिल्म पर रोक लगाने के लिए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि फिल्म को रिलीज़ होने से पहले रोका जाए क्योंकि यह माहौल को बिगाड़ सकती है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा:
“हम फिल्म को रिलीज़ से पहले नहीं रोक सकते। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक तभी लगेगी जब यह साबित हो कि फिल्म से गंभीर खतरा है।”
सुप्रीम कोर्ट ने मामला दिल्ली हाईकोर्ट को सौंप दिया है और वहां इस पर 28 जुलाई 2025 को सुनवाई होगी।
नई रिलीज़ डेट
फिल्म के निर्माता भरत श्रीनेत ने घोषणा की है कि अब फिल्म 8 अगस्त 2025 को रिलीज़ होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म का प्रमोशन और प्रेस मीट भी उसी दिन से शुरू किए जाएंगे।
पहले फिल्म जुलाई में रिलीज़ होनी थी, लेकिन विवाद और कानूनी प्रक्रिया के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया।
फिल्म निर्माताओं का पक्ष
निर्माताओं का कहना है:
यह फिल्म किसी नफरत के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई दिखाने के लिए बनाई गई है।
जो घटनाएं दिखाई गई हैं, वे जांच रिपोर्ट और केस फाइल्स पर आधारित हैं।
उनका उद्देश्य है कि लोग इस घटना के पीछे की पूरी सच्चाई को बिना अफवाह के समझें।
वर्तमान स्थिति
फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है।
समर्थक: इस फिल्म को “सच्चाई उजागर करने का साहसिक प्रयास” बता रहे हैं।
विरोधी: इसे “साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला कदम” मान रहे हैं।
अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले और 8 अगस्त 2025 को रिलीज़ पर टिकी हैं।